1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

जिससे इधर-उधर जान छिपाने का अवसर न पाकर परतंत्रता अंदर-ही-अंदर राख हो जाएगी, यह निर्धारित योजना-लखनऊ की गुप्त समिति को यद्यपि मान्य थी, फिर भी वहां के तेजस्वी सिपाही बहादुरों को अपना गुस्सा दबाए रखना कठिन हो गया। उसमें भी हर रात की गुप्त सभाओं में चल रहे उद्दीपक भाषणों और जलनेवाले घरों के भयंकर दृश्यों से सिपाहियों को रूकना और अपने को रोकना कठिन


1857 का स्वातंत्र्य समर - 101

हो गया। मई की 3 तारीख


423 of 2102

जिससे इधर-उधर जान छिपाने का अवसर न पाकर परतंत्रता अंदर-ही-अंदर राख हो जाएगी, यह निर्धारित योजना-लखनऊ की गुप्त समिति को यद्यपि मान्य थी, फिर भी वहां के तेजस्वी सिपाही बहादुरों को अपना गुस्सा दबाए रखना कठिन हो गया। उसमें भी हर रात की गुप्त सभाओं में चल रहे उद्दीपक भाषणों और जलनेवाले घरों के भयंकर दृश्यों से सिपाहियों को रूकना और अपने को रोकना कठिन


1857 का स्वातंत्र्य समर - 101

हो गया। मई की 3 तारीख


423 of 2102