मई की 9 तारीख को एक हृदयद्रावक घटना घटी। यूरोपियन कंपनी और तोपखाने की मार के पहरे में ऊंचाई पर पचासी सिपाहियों को खड़ा किया गया। शेष नेटिव सिपाहियांे को यह तमाशा देखने को जान-बूझकर बुलाया गया और फिर उन पचासी देशभक्त सैनिकों को अपने कपड़े उतरवाकर लोहे की भारी-भारी बेड़ियां उनके पैरों और हाथों में ठोंक दी गई। शत्रु की छाती में घुसनेवाली तलवार के सिवाए जिनके हाथों में अन्य कुछ भी न पड़ा था, अपने उन मर्द
मई की 9 तारीख को एक हृदयद्रावक घटना घटी। यूरोपियन कंपनी और तोपखाने की मार के पहरे में ऊंचाई पर पचासी सिपाहियों को खड़ा किया गया। शेष नेटिव सिपाहियांे को यह तमाशा देखने को जान-बूझकर बुलाया गया और फिर उन पचासी देशभक्त सैनिकों को अपने कपड़े उतरवाकर लोहे की भारी-भारी बेड़ियां उनके पैरों और हाथों में ठोंक दी गई। शत्रु की छाती में घुसनेवाली तलवार के सिवाए जिनके हाथों में अन्य कुछ भी न पड़ा था, अपने उन मर्द