में से एकाध वहां होता तो उसके हाथ पर चढ़ाई गई फिरंगी बेड़ी के निशान की ओर अंगुली दिखाकर-‘इसका प्रतिशोध लेना है’ कहते हुए वार-पर-वार करने लगते।
वास्तविकता यह थी कि यदि कहीं पहले विद्रोह खड़ा होने की संभावना नहीं थी तो वह मेरठ में; क्योंकि वहां नेटिव सिपाहियों की दो पैदल रेजिमेंट और एक
1857 का स्वातंत्र्य समर - 105
घुड़सवार रेजिमेंट थी। परंतु गोरे सिपाहियों की एक पूरी राठफलमेंस बटालियन और एक ड्रगून
में से एकाध वहां होता तो उसके हाथ पर चढ़ाई गई फिरंगी बेड़ी के निशान की ओर अंगुली दिखाकर-‘इसका प्रतिशोध लेना है’ कहते हुए वार-पर-वार करने लगते।
वास्तविकता यह थी कि यदि कहीं पहले विद्रोह खड़ा होने की संभावना नहीं थी तो वह मेरठ में; क्योंकि वहां नेटिव सिपाहियों की दो पैदल रेजिमेंट और एक
1857 का स्वातंत्र्य समर - 105
घुड़सवार रेजिमेंट थी। परंतु गोरे सिपाहियों की एक पूरी राठफलमेंस बटालियन और एक ड्रगून