1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

चतुराई भरी थी। पहले झटके में दिल्ली पर कब्जा कर विद्रोह को एक क्षण में राष्ट्रीय होने की सूचना अंगे्रज अधिकारियों के कानों तक पहुंचती, तभी दिल्ली की ओर जानेवाले तार तोड़कर और रास्ता रोककर, कारागृह से अपने धर्मवीरों को मुक्त करके, अंगे्रजों के रक्त के नाले बहाकर, वे दो हजार सिपाही गोरे रक्त से रंगी अपनी तलवारें ऊंची उठाकर गर्जना करने लगे-‘दिल्ली! दिल्ली!! चलो दिल्ली!!!’


1857 का स्वातंत्र्य समर - 106


449 of 2102

चतुराई भरी थी। पहले झटके में दिल्ली पर कब्जा कर विद्रोह को एक क्षण में राष्ट्रीय होने की सूचना अंगे्रज अधिकारियों के कानों तक पहुंचती, तभी दिल्ली की ओर जानेवाले तार तोड़कर और रास्ता रोककर, कारागृह से अपने धर्मवीरों को मुक्त करके, अंगे्रजों के रक्त के नाले बहाकर, वे दो हजार सिपाही गोरे रक्त से रंगी अपनी तलवारें ऊंची उठाकर गर्जना करने लगे-‘दिल्ली! दिल्ली!! चलो दिल्ली!!!’


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