1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

से दूसरे हाथ तक पुस्तक का प्रसारण यदि जोखिम भरा था तो उसका गुप्त रूप से मुद्रण तो बहुत ही जोखिम भरा रहा होगा। ऐसे कितने संस्करण किस-किस भाषा में कहां-कहां छपे, इसकी पूरी जानकारी आना अभी शेष है। कुछ ही संस्करणें की जानकारी अभी तक उपलब्ध हो पाई है।

पुस्तक के अध्ययन की भूख केवल भारत तक ही सीमित नहीं थी, यूरोप, जापान और अमेरिका में भी उसकी चाह पैदा हुई। उसका फ्रेंच अनुवाद सन् 1910 में ही प्रकाशित हो


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से दूसरे हाथ तक पुस्तक का प्रसारण यदि जोखिम भरा था तो उसका गुप्त रूप से मुद्रण तो बहुत ही जोखिम भरा रहा होगा। ऐसे कितने संस्करण किस-किस भाषा में कहां-कहां छपे, इसकी पूरी जानकारी आना अभी शेष है। कुछ ही संस्करणें की जानकारी अभी तक उपलब्ध हो पाई है।

पुस्तक के अध्ययन की भूख केवल भारत तक ही सीमित नहीं थी, यूरोप, जापान और अमेरिका में भी उसकी चाह पैदा हुई। उसका फ्रेंच अनुवाद सन् 1910 में ही प्रकाशित हो


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