1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

गया। एम.पी.टी. आचार्य और मैडम कामा ने वह फ्रेंच अनुवाद तैयार किया। एक फ्रांसिसि क्रांतिकारी व पत्रकार ई. पिरियोन ने उसका प्राक्कथन लिखा। उसकी भाषा व शैली से अभिभूत होकर उन्होंने लिखा कि यह एक माहकाव्य है, दैवी मंत्रोच्चार है, देशभक्ति का दिशाबोध है। यह पुस्तक हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश देती है, क्योंकि महमूद गजनवी के बाद 1857 में ही हिंदुओं और मुसलमानों ने मिलकर समान शत्रु के विरू˜ यु˜ लड़ा। यह सही


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गया। एम.पी.टी. आचार्य और मैडम कामा ने वह फ्रेंच अनुवाद तैयार किया। एक फ्रांसिसि क्रांतिकारी व पत्रकार ई. पिरियोन ने उसका प्राक्कथन लिखा। उसकी भाषा व शैली से अभिभूत होकर उन्होंने लिखा कि यह एक माहकाव्य है, दैवी मंत्रोच्चार है, देशभक्ति का दिशाबोध है। यह पुस्तक हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश देती है, क्योंकि महमूद गजनवी के बाद 1857 में ही हिंदुओं और मुसलमानों ने मिलकर समान शत्रु के विरू˜ यु˜ लड़ा। यह सही


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