हो रहा था। पर बादशाह और बेगम जीतन महलने बड़ी कुशलता से सारी दिल्ली की गुप्त समिति को संदेश आया कि हम कल आ रहे हैं, तैयारी रखो!! यह अपूर्व और आकस्मिक संदेश दिल्ली में पहंुचते -न-पहुंचते मेरठ से दो हजार सिपाही ‘दिल्ली! दिल्ली! की गर्जना करते हुए निकल गए। उस रविवार की रात को पूर्ण रतजगा रहा। हजारों घोड़े दौड़ रहे हैं, हिनहिना रहे हैं, तलवारों और बैनेटों की खनखनाहट हो रही है-ऐसा यह भयानक दृश्य देखते हुए रात
हो रहा था। पर बादशाह और बेगम जीतन महलने बड़ी कुशलता से सारी दिल्ली की गुप्त समिति को संदेश आया कि हम कल आ रहे हैं, तैयारी रखो!! यह अपूर्व और आकस्मिक संदेश दिल्ली में पहंुचते -न-पहुंचते मेरठ से दो हजार सिपाही ‘दिल्ली! दिल्ली! की गर्जना करते हुए निकल गए। उस रविवार की रात को पूर्ण रतजगा रहा। हजारों घोड़े दौड़ रहे हैं, हिनहिना रहे हैं, तलवारों और बैनेटों की खनखनाहट हो रही है-ऐसा यह भयानक दृश्य देखते हुए रात