1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

जाग रही थी। अंत में भोर हुई और अपना पीछा करता मेरठ का तोपखाना अभी भी नहीं आया, यह देखकर उत्साहित वे सिपाही रात भर हुए कश्टों को भूलकर एक क्षण भी कहीं न ठहरकर वेसे ही आगे बढ़े। मेरठ से दिल्ली कोई 32 मील है। सुबह के आठ बजे सेना के प्रमुख हिस्से को यमुना का पवित्र दर्शन हुआ। स्वतंत्रता के पवित्र कार्य के लिए जानेवाले योद्धाओं को अपने शातल जल से सिंचित कर प्रोत्साहन देनेवाली भगवती यमुना उन्हें दिखते ही


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जाग रही थी। अंत में भोर हुई और अपना पीछा करता मेरठ का तोपखाना अभी भी नहीं आया, यह देखकर उत्साहित वे सिपाही रात भर हुए कश्टों को भूलकर एक क्षण भी कहीं न ठहरकर वेसे ही आगे बढ़े। मेरठ से दिल्ली कोई 32 मील है। सुबह के आठ बजे सेना के प्रमुख हिस्से को यमुना का पवित्र दर्शन हुआ। स्वतंत्रता के पवित्र कार्य के लिए जानेवाले योद्धाओं को अपने शातल जल से सिंचित कर प्रोत्साहन देनेवाली भगवती यमुना उन्हें दिखते ही


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