1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

और सूअर के रक्त से बने कारतूसों के रूप में हमें मिला। अभी भी संभलों और उस चर्च की व्यवस्था करने के लिए पहले उसी की ओर बढ़ो! देखते क्या हो? फोड़ो वह क्राॅस! दीवारों की सारी चमड़ी उखाड़ो, उस व्यासपीठ का चूरा बनाओ और बोलो-दीन! रोज चर्च में आते समय यह घंटा बजता है। अब हम उसको घनघनाएं। बज घंटा, बज! आज तू इतना बज रहा है, पर कोई गोरा तेरी ओर क्यों नहीं बढ़ रहा? तुझे इन काले हाथों का स्पर्श भाता है क्या? हाथ का


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और सूअर के रक्त से बने कारतूसों के रूप में हमें मिला। अभी भी संभलों और उस चर्च की व्यवस्था करने के लिए पहले उसी की ओर बढ़ो! देखते क्या हो? फोड़ो वह क्राॅस! दीवारों की सारी चमड़ी उखाड़ो, उस व्यासपीठ का चूरा बनाओ और बोलो-दीन! रोज चर्च में आते समय यह घंटा बजता है। अब हम उसको घनघनाएं। बज घंटा, बज! आज तू इतना बज रहा है, पर कोई गोरा तेरी ओर क्यों नहीं बढ़ रहा? तुझे इन काले हाथों का स्पर्श भाता है क्या? हाथ का


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