1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

अपमान देखकर गुस्सा हुए हजारों सिपाही उस बारूदखाने की दीवार पर चढ़ने लगे। बारूदखाने


1857 का स्वातंत्र्य समर - 111

के अंदर नौ अंगे्रज और कुछ भारतीय लोग थे। दीवार पर दिल्ली के बादशाह का निशान लगा देखकर भारतीय लोग अपने स्वदेश बंधुओं को तेजी से आकर मिलने लगे और उन नौ अंगे्रजों पर निराशा की छाया मंडराने लगी। सिपाहियों की लगातार मार के आगे अंगे्रज कितनी देर टिक सकेंगे, यह दिख ही रहा था। उन्होंने समय अपने पर बारूदखाना उड़ा देने का निश्चय किया था,


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अपमान देखकर गुस्सा हुए हजारों सिपाही उस बारूदखाने की दीवार पर चढ़ने लगे। बारूदखाने


1857 का स्वातंत्र्य समर - 111

के अंदर नौ अंगे्रज और कुछ भारतीय लोग थे। दीवार पर दिल्ली के बादशाह का निशान लगा देखकर भारतीय लोग अपने स्वदेश बंधुओं को तेजी से आकर मिलने लगे और उन नौ अंगे्रजों पर निराशा की छाया मंडराने लगी। सिपाहियों की लगातार मार के आगे अंगे्रज कितनी देर टिक सकेंगे, यह दिख ही रहा था। उन्होंने समय अपने पर बारूदखाना उड़ा देने का निश्चय किया था,


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