1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

की राष्ट्रीय क्रांति इसलिए नहीं हुई थी कि हिंदुस्थान के लोगों को गोरी औरतें नहीं मिलती थी। उलटे, गोरी महिला के मनहूस कदम (मराठी में पाढरा पाप अर्थात् गोरे पांव) फिर से अपने घर में न पड़ें, इसलिए सन् 1857 का राष्ट्र-क्षोभ उद्भूत हुआ था।

इस तरह मेरठ की महिलाओं के फुफकार से उठे उस भयानक चक्रवात के चक्कर में पड़ पांच दिन के अंदर हिंदुस्थान में सौ वर्ष से जमा हुआ गुलामी का विषवृक्ष भरभराकर गिर गया। इन पहले


485 of 2102

की राष्ट्रीय क्रांति इसलिए नहीं हुई थी कि हिंदुस्थान के लोगों को गोरी औरतें नहीं मिलती थी। उलटे, गोरी महिला के मनहूस कदम (मराठी में पाढरा पाप अर्थात् गोरे पांव) फिर से अपने घर में न पड़ें, इसलिए सन् 1857 का राष्ट्र-क्षोभ उद्भूत हुआ था।

इस तरह मेरठ की महिलाओं के फुफकार से उठे उस भयानक चक्रवात के चक्कर में पड़ पांच दिन के अंदर हिंदुस्थान में सौ वर्ष से जमा हुआ गुलामी का विषवृक्ष भरभराकर गिर गया। इन पहले


485 of 2102