1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

यह भावना और राजनीति लोकपक्ष का कर्तव्य है, यह चेतना हिंदुस्थान के शरीर में इन पांच दिनों में उदय हुई।

लोकपक्ष की यह जयंती हिंदुस्थान के इतिहास में अविस्मरणीय रहे।


1857 का स्वातंत्र्य समर - 114

प्रकरण-4

मध्यांतर और पंजाब

दिल्ली स्वतंत्र हो जाने की वार्Ÿाा विद्युत वेग से फैलते ही उसकी आकस्मिकता ने सारे हिंदुस्थान में अपनों और परायों दोनों को क्षण भर के लिए तो चकित कर दिया। अंग्रेजों को तो


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यह भावना और राजनीति लोकपक्ष का कर्तव्य है, यह चेतना हिंदुस्थान के शरीर में इन पांच दिनों में उदय हुई।

लोकपक्ष की यह जयंती हिंदुस्थान के इतिहास में अविस्मरणीय रहे।


1857 का स्वातंत्र्य समर - 114

प्रकरण-4

मध्यांतर और पंजाब

दिल्ली स्वतंत्र हो जाने की वार्Ÿाा विद्युत वेग से फैलते ही उसकी आकस्मिकता ने सारे हिंदुस्थान में अपनों और परायों दोनों को क्षण भर के लिए तो चकित कर दिया। अंग्रेजों को तो


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