1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

किया। ऐसे ये पांच दिन इतिहास में चिरस्मरणीय रहें।

इन पांच दिनों में हिंदुस्थान में लोकशक्ति का प्रथमोदय हुआ। अपेन पर कौन राज्य करे, इस प्रश्न का निर्णय करने का कार्य लोकपक्ष का है। इस संवेदना का जन्म हिंदुस्थान में इन पांच का निर्णय करने का कार्य लोकपद्वक्ष का है। इस संवदेना का जन्म हिंदुस्थान में इन पांच दिनों में हुआ। लोकपक्ष ने ही उस राज सिंहासन पर स्वसम्मत पुरूषार्थ की योजना की। लोगों को जो पसंद होगा उसी का राज्य स्वदेश पर चले,


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किया। ऐसे ये पांच दिन इतिहास में चिरस्मरणीय रहें।

इन पांच दिनों में हिंदुस्थान में लोकशक्ति का प्रथमोदय हुआ। अपेन पर कौन राज्य करे, इस प्रश्न का निर्णय करने का कार्य लोकपक्ष का है। इस संवेदना का जन्म हिंदुस्थान में इन पांच का निर्णय करने का कार्य लोकपद्वक्ष का है। इस संवदेना का जन्म हिंदुस्थान में इन पांच दिनों में हुआ। लोकपक्ष ने ही उस राज सिंहासन पर स्वसम्मत पुरूषार्थ की योजना की। लोगों को जो पसंद होगा उसी का राज्य स्वदेश पर चले,


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