राज्य क्रांति का स्वरूप मिल गया और इस असंभव वार्Ÿाा से एक विलक्षण चेतना का जन्म हो गया था।
1857 का स्वातंत्र्य समर -115
अब इस चेतना का लाभ उठाकर एकदम विद्रोह किया जाए या पूर्व नियोजित संकेत के अनुसार 31 मई की राह देखी जाए? दिल्ली के विद्रोह की वार्Ÿाा सुन अन्यत्र क्या योजना चल रही है? दिल्ली की जल्दबाजी से जैसा घोटाला हुआ वैसे ही अन्य स्थानों की सम्मति लिये बिना हम भी विद्रोह करें और घोटाला फैल
राज्य क्रांति का स्वरूप मिल गया और इस असंभव वार्Ÿाा से एक विलक्षण चेतना का जन्म हो गया था।
1857 का स्वातंत्र्य समर -115
अब इस चेतना का लाभ उठाकर एकदम विद्रोह किया जाए या पूर्व नियोजित संकेत के अनुसार 31 मई की राह देखी जाए? दिल्ली के विद्रोह की वार्Ÿाा सुन अन्यत्र क्या योजना चल रही है? दिल्ली की जल्दबाजी से जैसा घोटाला हुआ वैसे ही अन्य स्थानों की सम्मति लिये बिना हम भी विद्रोह करें और घोटाला फैल