गया तो क्या होगा? ऐसी अनेक अनिश्चिताओं के कारण क्रांतिकारी नेताओं को-आगे क्या होना है-उसकी प्रतीक्षा करते हुए अपनी-अपनी जगह रूके रहना पड़ा। मंद गति जैसा क्रांति का प्राण हरण करनेवाला दूसरा विष नहीं है। क्रांति का विस्तार जितना त्वरित और जितना आकस्मिक होता है उतनी ही उसकी विजय की संभावना अधिक होती है। यह विस्तार का वेग शिथिल तो शत्रु को संरक्षण का अवसर मिल जाता है। जो पहले उठते हैं उनका उत्साह यह देखकर
गया तो क्या होगा? ऐसी अनेक अनिश्चिताओं के कारण क्रांतिकारी नेताओं को-आगे क्या होना है-उसकी प्रतीक्षा करते हुए अपनी-अपनी जगह रूके रहना पड़ा। मंद गति जैसा क्रांति का प्राण हरण करनेवाला दूसरा विष नहीं है। क्रांति का विस्तार जितना त्वरित और जितना आकस्मिक होता है उतनी ही उसकी विजय की संभावना अधिक होती है। यह विस्तार का वेग शिथिल तो शत्रु को संरक्षण का अवसर मिल जाता है। जो पहले उठते हैं उनका उत्साह यह देखकर