1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

ऐसा एक शोर होते ही गोरी औरतें और बच्चे जिधर राह दिखे उस तरफ भाग निकले। इस भागमभाग में अंगे्रज पुरूषांे ने स्वाभाविक ही महिलाओं को पीछे छोड़ दिया-और वह भी अपने सामान के थैले पीठ पर बंधे होते हुए। अंगे्रजी धैर्य का प्रदर्शन दो दिन निरंतर चलता रहाः लेकिन जब गुरखा न आए तो हारकर वह प्रदर्शन बंद करना पड़ा। इसी समय कलकŸाा में भी रोज ऐसा ही होता था। कलकŸाा के पास बैरकपुर की नेटिव रेजिमेंट ने विद्रोह किया, यह अफवाह बार-बार उठती और अंगे्रजों की औरतें,


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ऐसा एक शोर होते ही गोरी औरतें और बच्चे जिधर राह दिखे उस तरफ भाग निकले। इस भागमभाग में अंगे्रज पुरूषांे ने स्वाभाविक ही महिलाओं को पीछे छोड़ दिया-और वह भी अपने सामान के थैले पीठ पर बंधे होते हुए। अंगे्रजी धैर्य का प्रदर्शन दो दिन निरंतर चलता रहाः लेकिन जब गुरखा न आए तो हारकर वह प्रदर्शन बंद करना पड़ा। इसी समय कलकŸाा में भी रोज ऐसा ही होता था। कलकŸाा के पास बैरकपुर की नेटिव रेजिमेंट ने विद्रोह किया, यह अफवाह बार-बार उठती और अंगे्रजों की औरतें,


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