बच्चे और पुरूष रास्ते से पोर्ट की ओर दौड़ते दिखाई देते। कितनों ने इंग्लैंड का टिकट निकाल लिया, कितनों ने अपनी गठरियां बांधकर पोर्ट की ओर भागने की तैयारी रखी और अनेक दफ्तर के काम छोड़ कोने-कोने में छिपे रहते। ऐसा डर मेरठ और दिल्ली में था, फिर भी अंगे्रजों का कानपुर अभी बचा हुआ था!
कमांडर-इन-चीफ अॅन्सन ने अंबाला आते ही दिल्ली पर घेरा डालने के लिए सीजटेªन तैयार करना शुरू किया। हिंदुस्थान पर आज तक कभी
बच्चे और पुरूष रास्ते से पोर्ट की ओर दौड़ते दिखाई देते। कितनों ने इंग्लैंड का टिकट निकाल लिया, कितनों ने अपनी गठरियां बांधकर पोर्ट की ओर भागने की तैयारी रखी और अनेक दफ्तर के काम छोड़ कोने-कोने में छिपे रहते। ऐसा डर मेरठ और दिल्ली में था, फिर भी अंगे्रजों का कानपुर अभी बचा हुआ था!
कमांडर-इन-चीफ अॅन्सन ने अंबाला आते ही दिल्ली पर घेरा डालने के लिए सीजटेªन तैयार करना शुरू किया। हिंदुस्थान पर आज तक कभी