ओर से आए निमंत्रण को धिक्कार दिया; निमंत्रण देने आए सवारों को मार डाला;स्वयं के खजाने से अंगे्रजों पर धन की सतत वर्षा की। जिस प्रदेश से अंगे्रजी सेना जानेवाली थी उस प्रदेश को सैन्य संरक्षण दिया; अंगे्रजों के साथ निशान को संभालने घर-द्वार छोड़कर दौड़ने आए तब इन सिख रियासतों ने-इन गुरू गोविन्द सिंह के चेलों ने-अत्यधिक क्रूरता से उनका वध किया, यंत्रणा दी।
1857 का स्वातंत्र्य समर - 118
पटियाला, नाभा
ओर से आए निमंत्रण को धिक्कार दिया; निमंत्रण देने आए सवारों को मार डाला;स्वयं के खजाने से अंगे्रजों पर धन की सतत वर्षा की। जिस प्रदेश से अंगे्रजी सेना जानेवाली थी उस प्रदेश को सैन्य संरक्षण दिया; अंगे्रजों के साथ निशान को संभालने घर-द्वार छोड़कर दौड़ने आए तब इन सिख रियासतों ने-इन गुरू गोविन्द सिंह के चेलों ने-अत्यधिक क्रूरता से उनका वध किया, यंत्रणा दी।
1857 का स्वातंत्र्य समर - 118
पटियाला, नाभा