सुरक्षित रहनेवाली नहीं थी। ये रियासतें अन्य रियासतों की तरह केवल चुप रही होती तो भी क्रांति सफल होने की बहुत संभावना थी। पंरतु पटियाला, जींद और नाभा-इन तीनों ने जब अंगे्रजों से भी अधिक क्रूरता से सन् 1857 की राज्य क्रांति को चोट पंहुचाना प्रारंभ किया तब पंजाब और दिल्ली, इन दो हिस्सों की यह जंजीर एकाएक टूट गई और उस क्रांति के अवयवों की संगति क्षणार्थ में नष्ट हो गई। इन रियासतों ने दिल्ली के बादशाह की
सुरक्षित रहनेवाली नहीं थी। ये रियासतें अन्य रियासतों की तरह केवल चुप रही होती तो भी क्रांति सफल होने की बहुत संभावना थी। पंरतु पटियाला, जींद और नाभा-इन तीनों ने जब अंगे्रजों से भी अधिक क्रूरता से सन् 1857 की राज्य क्रांति को चोट पंहुचाना प्रारंभ किया तब पंजाब और दिल्ली, इन दो हिस्सों की यह जंजीर एकाएक टूट गई और उस क्रांति के अवयवों की संगति क्षणार्थ में नष्ट हो गई। इन रियासतों ने दिल्ली के बादशाह की