1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

यह इच्छा अवश्य अति उत्कटता से दिल्ली के हजारों नागरिकों के हृदय में उछल रही थी और इसीलिए दिनांक 30 मई की पराजय के लिए सारी रात नागरिकों द्वारा धिक्कारे गए सिपाही फिर से 31 मई को बाहर निकले। क्रांतिकारियों की तोपों की भारी मार शुरू होते ही अंगे्रजों ने भी अपनी तोपें दागनी शुरू की। क्रांतिकारियों की तोपें आज अच्छे अनुशासन और बड़ी


1857 का स्वातंत्र्य समर - 121

जिद से हमला कर रही थीं, इसलिए अंगे्रजों


527 of 2102

यह इच्छा अवश्य अति उत्कटता से दिल्ली के हजारों नागरिकों के हृदय में उछल रही थी और इसीलिए दिनांक 30 मई की पराजय के लिए सारी रात नागरिकों द्वारा धिक्कारे गए सिपाही फिर से 31 मई को बाहर निकले। क्रांतिकारियों की तोपों की भारी मार शुरू होते ही अंगे्रजों ने भी अपनी तोपें दागनी शुरू की। क्रांतिकारियों की तोपें आज अच्छे अनुशासन और बड़ी


1857 का स्वातंत्र्य समर - 121

जिद से हमला कर रही थीं, इसलिए अंगे्रजों


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