कोई बात नहीं एक दिन में स्थिति कुछ सुधरी ही है। कल और ऐसी तीसरी पराजय झेली तो भी अंगे्रजों की दुर्दशा होगी, क्योंकि अब उनमंे क्रांतिकारियों से छोटी हाथापाई करने लायक भी शक्ति नहीं है। जून की पहली तारीख को ऐसी चिंता में पड़े अंगे्रजी कैंप के पीछे से एक सेना आती दिखी। अपनी पिछाड़ी पर चली आ रही यह सेना काले रंग की है, यह देखते ही अंगे्रजों में हड़बड़ी मच गई और वे किसी तरह संरक्षण के लिए तैयार होते, तभी उनके
कोई बात नहीं एक दिन में स्थिति कुछ सुधरी ही है। कल और ऐसी तीसरी पराजय झेली तो भी अंगे्रजों की दुर्दशा होगी, क्योंकि अब उनमंे क्रांतिकारियों से छोटी हाथापाई करने लायक भी शक्ति नहीं है। जून की पहली तारीख को ऐसी चिंता में पड़े अंगे्रजी कैंप के पीछे से एक सेना आती दिखी। अपनी पिछाड़ी पर चली आ रही यह सेना काले रंग की है, यह देखते ही अंगे्रजों में हड़बड़ी मच गई और वे किसी तरह संरक्षण के लिए तैयार होते, तभी उनके