ध्यान में आया कि वह क्रांतिकारियों की सेना नहीं है। अपितु मेजर रीड की अधीनता में अंगे्रजों की ओर से लड़ने गुरखे आ रहे हैं। अंबाला से नीचे आ रही अंगे्रजी ऐसी स्थिति में बेचारे गरीब क्रांतिकारी क्या करेंगे? ये दोनों अंगे्रजी सेनाएं 7 जून को एक-दूसरे से मिल गई। इस समय दिल्ली पर घेरा डालने के लिए तैयार करवाई गई सीजटेªन भी नाभा के राजा की सहायता से सही-सलामत आ पहुंची। इस सीजटेªन के अंबाला पहंुचते ही उसे
ध्यान में आया कि वह क्रांतिकारियों की सेना नहीं है। अपितु मेजर रीड की अधीनता में अंगे्रजों की ओर से लड़ने गुरखे आ रहे हैं। अंबाला से नीचे आ रही अंगे्रजी ऐसी स्थिति में बेचारे गरीब क्रांतिकारी क्या करेंगे? ये दोनों अंगे्रजी सेनाएं 7 जून को एक-दूसरे से मिल गई। इस समय दिल्ली पर घेरा डालने के लिए तैयार करवाई गई सीजटेªन भी नाभा के राजा की सहायता से सही-सलामत आ पहुंची। इस सीजटेªन के अंबाला पहंुचते ही उसे