सेना को टक्कर देने में ऐसा कमाल किया कि अंगे्रजों को जल्दी ही समझ में आ गया, यह तमाशा न होकर वास्तव में जान लेने या देनेवाली लड़ाई है। दिल्ली की सेना की तोपें इतनी जिद और जोर से जोर मार करने लगीं कि ऐसा लगने लगा जैसे उसके सामने अंगे्रजी
1857 का स्वातंत्र्य समर - 122
सेना की कुछ भी नहीं चलेगी। अंगे्रजी तोपखाने के गोलंदाज और अधिकारी चट-पट मरने लगे और क्रांतिकारियों की तोपों की मार और भी तेज हो गई।
सेना को टक्कर देने में ऐसा कमाल किया कि अंगे्रजों को जल्दी ही समझ में आ गया, यह तमाशा न होकर वास्तव में जान लेने या देनेवाली लड़ाई है। दिल्ली की सेना की तोपें इतनी जिद और जोर से जोर मार करने लगीं कि ऐसा लगने लगा जैसे उसके सामने अंगे्रजी
1857 का स्वातंत्र्य समर - 122
सेना की कुछ भी नहीं चलेगी। अंगे्रजी तोपखाने के गोलंदाज और अधिकारी चट-पट मरने लगे और क्रांतिकारियों की तोपों की मार और भी तेज हो गई।