उनके साथ अंत तक केवल खड़ा रहनेवाला सेनापति भी उन्हें नहीं मिला था, बल्कि जब अंगे्रजों की संगीन छाती में घुसने के बाद भी अपना स्थान छोड़कर एक पैर भी पीछे न हटानेवाले वाीर स्वदेश और स्वधर्म के लिए प्राण न्योछावर कर रहे थे तो उनका कमांडर-इन-चीफ तोप की पहली आवाज होते ही सिर पर पांव रखकर दिल्ली भाग गया था। इतने में उस अभागी सेना क बाई ओर अंगे्रजों के घुड़सवार टूट पड़े और उनपर पीछे से होपग्रांट ने घुड़सवार-तोपखाने
उनके साथ अंत तक केवल खड़ा रहनेवाला सेनापति भी उन्हें नहीं मिला था, बल्कि जब अंगे्रजों की संगीन छाती में घुसने के बाद भी अपना स्थान छोड़कर एक पैर भी पीछे न हटानेवाले वाीर स्वदेश और स्वधर्म के लिए प्राण न्योछावर कर रहे थे तो उनका कमांडर-इन-चीफ तोप की पहली आवाज होते ही सिर पर पांव रखकर दिल्ली भाग गया था। इतने में उस अभागी सेना क बाई ओर अंगे्रजों के घुड़सवार टूट पड़े और उनपर पीछे से होपग्रांट ने घुड़सवार-तोपखाने