टुकड़ी लाहौर के किले पर भेजी गई। उस टुकड़ी ने लाहौर किले के तोपखाने पर नियुक्त अंगे्रजी सोल्जर की सहायता से वहां के नेटिव सिपाहियों को निःशस्त्र कर किले से निकाल दिया ओर किला अपने कब्जे में ले लिया। 13 मई को अंगे्रजों ने जिस फुरती से यह साहस भरा कृत्य पूरा किया उस फुरती से यदि एक अंणु मात्र भी ढील हुई होती तो उस दिन से पंद्रह दिन के अंदर सारा पंजाब विद्रोह की आग में जलने लगा होता; क्योंकि पेशावर, अमृतसर,
टुकड़ी लाहौर के किले पर भेजी गई। उस टुकड़ी ने लाहौर किले के तोपखाने पर नियुक्त अंगे्रजी सोल्जर की सहायता से वहां के नेटिव सिपाहियों को निःशस्त्र कर किले से निकाल दिया ओर किला अपने कब्जे में ले लिया। 13 मई को अंगे्रजों ने जिस फुरती से यह साहस भरा कृत्य पूरा किया उस फुरती से यदि एक अंणु मात्र भी ढील हुई होती तो उस दिन से पंद्रह दिन के अंदर सारा पंजाब विद्रोह की आग में जलने लगा होता; क्योंकि पेशावर, अमृतसर,