1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

पर जिस शूर और स्वाभिमानी जाति को इतना गुस्सा आया था कि सौ वर्ष तक अखंड लड़ाई कर अंत में पंजाब को स्वतंत्र किए बिना उन्होंने तलवार नीचे नहीं रखी, उसी ‘खालसा’ पंथ के अनुयायियों ने अंगे्रजों की गुलामी को इतना चाहा हो, ऐसा बिलकुल नहीं है। पर अंग्रेजों का राज गुलामी है या नहीं, यह उन सिपाहियों की बुद्धि में पूर्णता से आ भी नहीं पाया कि सन् 18567 आ गया। अंगे्रजों का राज हिंदुस्थान पर ऐसे ही समय आया जिस समय


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पर जिस शूर और स्वाभिमानी जाति को इतना गुस्सा आया था कि सौ वर्ष तक अखंड लड़ाई कर अंत में पंजाब को स्वतंत्र किए बिना उन्होंने तलवार नीचे नहीं रखी, उसी ‘खालसा’ पंथ के अनुयायियों ने अंगे्रजों की गुलामी को इतना चाहा हो, ऐसा बिलकुल नहीं है। पर अंग्रेजों का राज गुलामी है या नहीं, यह उन सिपाहियों की बुद्धि में पूर्णता से आ भी नहीं पाया कि सन् 18567 आ गया। अंगे्रजों का राज हिंदुस्थान पर ऐसे ही समय आया जिस समय


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