यह मानने को बिल्कुल तैयार नहीं थे कि उनके अधीनस्थ सिपाही विद्रोह पर उतारू हैं। फिर भी काॅटन और निकल्सन ने इस नेटिव सिपाहियों को 21 मई को सुबह के समय यूरोपियन सेना से घेरकर निःशस्त्र करने का आदेश दिया। इस अकस्मात् हुए हमले से बच पाना असंभव है, यह देखकर सारे सिपाहियों ने अपने हथियार नीचे रखे और यह अपमान भरा कृत्य देखकर क्रोधित उनके अंगे्रज अधिकारी भी अपने सिपाहियों के साथ कंपनी को धिक्कारने लगे।
पेशावर
यह मानने को बिल्कुल तैयार नहीं थे कि उनके अधीनस्थ सिपाही विद्रोह पर उतारू हैं। फिर भी काॅटन और निकल्सन ने इस नेटिव सिपाहियों को 21 मई को सुबह के समय यूरोपियन सेना से घेरकर निःशस्त्र करने का आदेश दिया। इस अकस्मात् हुए हमले से बच पाना असंभव है, यह देखकर सारे सिपाहियों ने अपने हथियार नीचे रखे और यह अपमान भरा कृत्य देखकर क्रोधित उनके अंगे्रज अधिकारी भी अपने सिपाहियों के साथ कंपनी को धिक्कारने लगे।
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