उनके उस विश्वास के फलस्वरूप ही उन्हें जीवनदान देने की उदारता सिपाहियों ने दिखाई। और उन व्यक्तिगत संबंधों को राष्ट्रकार्य
1857 का स्वातंत्र्य समर - 134
में बाधा न बनने देकर यद्यपि अपनी रेजिमेंट पर सरकार खुश थी, तब भी मातृभूमि की स्वतंत्रता के युद्ध का शंखनाद होते ही उस उदाŸा कर्तव्य पर उन्होंने कैसा आत्मार्पण किया, यह पूर्वोक्त वर्णन से स्पष्ट दृष्टिगत होेता है।
उस आधी रात को विद्रोह शुरू करने
उनके उस विश्वास के फलस्वरूप ही उन्हें जीवनदान देने की उदारता सिपाहियों ने दिखाई। और उन व्यक्तिगत संबंधों को राष्ट्रकार्य
1857 का स्वातंत्र्य समर - 134
में बाधा न बनने देकर यद्यपि अपनी रेजिमेंट पर सरकार खुश थी, तब भी मातृभूमि की स्वतंत्रता के युद्ध का शंखनाद होते ही उस उदाŸा कर्तव्य पर उन्होंने कैसा आत्मार्पण किया, यह पूर्वोक्त वर्णन से स्पष्ट दृष्टिगत होेता है।
उस आधी रात को विद्रोह शुरू करने