इसलिए उन्हें निःशस्त्र न करें, ऐसा वहां के अंगे्रजी अधिकारियों ने अंत तक सरकार को सूचित किया हुआ था और उनका सचमुच उन सिपाहियों पर विश्वास था। इस कारण भी सिपाहियों ने उन पर आक्रमण नहीं किया। इतना ही नहीं अपितु जालंधर छोड़ते समय भी उन्होंने उनके हाथ में आए अधिकारियों को जीवनदान दिया। जालंधर के सैनिकों ने अपनी योजना को कितना गुप्त रखा था, उस गुप्तता के झांसे में आकर ही जिन व्यक्तियों ने उन पर विश्वास किया था,
इसलिए उन्हें निःशस्त्र न करें, ऐसा वहां के अंगे्रजी अधिकारियों ने अंत तक सरकार को सूचित किया हुआ था और उनका सचमुच उन सिपाहियों पर विश्वास था। इस कारण भी सिपाहियों ने उन पर आक्रमण नहीं किया। इतना ही नहीं अपितु जालंधर छोड़ते समय भी उन्होंने उनके हाथ में आए अधिकारियों को जीवनदान दिया। जालंधर के सैनिकों ने अपनी योजना को कितना गुप्त रखा था, उस गुप्तता के झांसे में आकर ही जिन व्यक्तियों ने उन पर विश्वास किया था,