की भांत लुधियाना भी विद्रोह का केंद्र हो जाता तो उससे अंगे्रजी सŸाा को जोरदार धक्का लगा होता । हालांकि विद्रोही यह समझते नहीं थे, सिपाही; न उनका कोई सेनापति था, न ही कोई नेता। उनके पास यात्रा हेतु आवश्यक सामग्री भी नहीं थी। ऐेसे समय में वहां कोई नाना साहब, खान बहादुर या मौलवी अहमद शाह होता तो उसने लुधियाना को कभी न छोड़ा होता। परंतु उन सबके न होने के कारण उन्हें दिल्ली की ओर जाने के सिवाय दूसरा मार्ग ही नहीं था और इसीलिए-स्वराज्य या गुलामी,
की भांत लुधियाना भी विद्रोह का केंद्र हो जाता तो उससे अंगे्रजी सŸाा को जोरदार धक्का लगा होता । हालांकि विद्रोही यह समझते नहीं थे, सिपाही; न उनका कोई सेनापति था, न ही कोई नेता। उनके पास यात्रा हेतु आवश्यक सामग्री भी नहीं थी। ऐेसे समय में वहां कोई नाना साहब, खान बहादुर या मौलवी अहमद शाह होता तो उसने लुधियाना को कभी न छोड़ा होता। परंतु उन सबके न होने के कारण उन्हें दिल्ली की ओर जाने के सिवाय दूसरा मार्ग ही नहीं था और इसीलिए-स्वराज्य या गुलामी,