और विशेष कारण है। सिखों के इस विरोध की परवाह न कर पंजाब से अंगे्रजों को भगाना किसी तरह भी संभव नहीं, ऐसा नहीं था। अंगे्रज जिस विलक्षण ढीलेपन से मई माह तक रहते थे उस ढीलेपन का लाभ उठाकर पूर्व संकल्प के अनुसार सब ओर एक साथ विद्रोह हुआ होता तो सिखों पर भी क्रांतिकारियों का आतंक छाने से कम-से-कम उनमें फूट तो निश्चित ही पड़ जाती। विशेषकर पंजाब के नेटिव सिपाहियों को एक-एक कर पकड़कर अंगे्रज जिस तरह उन्हें नरम
और विशेष कारण है। सिखों के इस विरोध की परवाह न कर पंजाब से अंगे्रजों को भगाना किसी तरह भी संभव नहीं, ऐसा नहीं था। अंगे्रज जिस विलक्षण ढीलेपन से मई माह तक रहते थे उस ढीलेपन का लाभ उठाकर पूर्व संकल्प के अनुसार सब ओर एक साथ विद्रोह हुआ होता तो सिखों पर भी क्रांतिकारियों का आतंक छाने से कम-से-कम उनमें फूट तो निश्चित ही पड़ जाती। विशेषकर पंजाब के नेटिव सिपाहियों को एक-एक कर पकड़कर अंगे्रज जिस तरह उन्हें नरम