इसलिए उसे कैद कर अंगे्रज अधिकारियों ने सिपाहियों के पहरे में अलीगढ़ भेज दिया। परंतु आधे रास्ते में आने के बाद पहरे के सिपाहियों ने रामदीन सिंह को मुक्त कर दिया। उन्होंने उसकी बेड़िया काट डाली और वे चुपचाप मैनपुरी लौट आए।
इस स्थिति तक पहुंचा वह नेटिव लश्कर केवल संकेत समय के लिए रूका हुआ था और उस एक निश्चित समय के पूर्व शत्रु को अपने पैर काट डालने का अवसर न मिले, इसलिए ऊपर से इतना शांत व्यवहार कर रहा
इसलिए उसे कैद कर अंगे्रज अधिकारियों ने सिपाहियों के पहरे में अलीगढ़ भेज दिया। परंतु आधे रास्ते में आने के बाद पहरे के सिपाहियों ने रामदीन सिंह को मुक्त कर दिया। उन्होंने उसकी बेड़िया काट डाली और वे चुपचाप मैनपुरी लौट आए।
इस स्थिति तक पहुंचा वह नेटिव लश्कर केवल संकेत समय के लिए रूका हुआ था और उस एक निश्चित समय के पूर्व शत्रु को अपने पैर काट डालने का अवसर न मिले, इसलिए ऊपर से इतना शांत व्यवहार कर रहा