1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

है। मई की 10 तारीख को मेरठ में क्रांति होने के बाद अंगे्रजों से लड़े सिपाही राजनाथ सिंह के अपने गांव जीवंती लौटने का समाचार मैनपुरी के अधिकारियों को मिलने पर उन्होंने अपनी 9वीं रेजिमेंट के कुछ सिपाहियों को उसे पकड़ने के लिए भेजा। परंतु उन सिपाहियों ने राजनाथ सिंह को पकड़ने की जगह सुरक्षा के साथ उसे जीवंती के बाहर पहुंचा दिया और अंगे्रजों को सूचना दी कि जीवंती में राजनाथ सिंह नाम का कोई व्यक्ति रहता ही नहीं। सिपाही रामदीन सिंह ने आदेश की अवहेलना की,


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है। मई की 10 तारीख को मेरठ में क्रांति होने के बाद अंगे्रजों से लड़े सिपाही राजनाथ सिंह के अपने गांव जीवंती लौटने का समाचार मैनपुरी के अधिकारियों को मिलने पर उन्होंने अपनी 9वीं रेजिमेंट के कुछ सिपाहियों को उसे पकड़ने के लिए भेजा। परंतु उन सिपाहियों ने राजनाथ सिंह को पकड़ने की जगह सुरक्षा के साथ उसे जीवंती के बाहर पहुंचा दिया और अंगे्रजों को सूचना दी कि जीवंती में राजनाथ सिंह नाम का कोई व्यक्ति रहता ही नहीं। सिपाही रामदीन सिंह ने आदेश की अवहेलना की,


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