लिए जल्दी कर रहे हों वह कृत्य अब भी टालना सिपाहियों को अच्छा कैसे लगे! और तभी अलीगढ़ का समाचार आया। रेजिमेंट के अन्य लोगों द्वारा विद्रोह कर देने के बाद अब केवल अपना ही रूका रहना निंदनीय है, यह देखकर मैनपुरी का लश्कर विद्रोह कर उठा। उन्होंने भी अलीगढ़ के अपने भाइयों की भांति अंगे्रजों को जीवनदान दिया, शस्त्रागार से शस्त्र और भरपूर गोला-बारूद ऊंटों पर लादकर उन सारे सिपाहियों ने 23 मई को दिल्ली की ओर तत्काल कूच किया।
लिए जल्दी कर रहे हों वह कृत्य अब भी टालना सिपाहियों को अच्छा कैसे लगे! और तभी अलीगढ़ का समाचार आया। रेजिमेंट के अन्य लोगों द्वारा विद्रोह कर देने के बाद अब केवल अपना ही रूका रहना निंदनीय है, यह देखकर मैनपुरी का लश्कर विद्रोह कर उठा। उन्होंने भी अलीगढ़ के अपने भाइयों की भांति अंगे्रजों को जीवनदान दिया, शस्त्रागार से शस्त्र और भरपूर गोला-बारूद ऊंटों पर लादकर उन सारे सिपाहियों ने 23 मई को दिल्ली की ओर तत्काल कूच किया।