इसी समय इटावा की टुकड़ी में भी धुआंधार हो रही थी। इस इटावा शहर के मुख्य मजिस्टेªट डेनियल की सहायता से पड़ोस के रास्ते पर गश्त करने को एक चुनी हुई सेना तैयार की। 19 मई को मेरठ से आए कुछ सिपाही इस सेना से मिले। वे मुट्ठी भर सिपाही शरण में आ गए और उन्हें कुछ थोड़े लोगों के सशस्त्र पहरे में रखने का आदेश मिला। यह आदेश हमारे सिरमाथे है, ऐसा दिखाते हुए मेरठ के उन सिपाहियों ने
1857 का स्वातंत्र्य समर - 142
इसी समय इटावा की टुकड़ी में भी धुआंधार हो रही थी। इस इटावा शहर के मुख्य मजिस्टेªट डेनियल की सहायता से पड़ोस के रास्ते पर गश्त करने को एक चुनी हुई सेना तैयार की। 19 मई को मेरठ से आए कुछ सिपाही इस सेना से मिले। वे मुट्ठी भर सिपाही शरण में आ गए और उन्हें कुछ थोड़े लोगों के सशस्त्र पहरे में रखने का आदेश मिला। यह आदेश हमारे सिरमाथे है, ऐसा दिखाते हुए मेरठ के उन सिपाहियों ने
1857 का स्वातंत्र्य समर - 142