को गांववालों ने उनका सफाया करना छोड़ उनकी प्रशंसा करते हुए उन्हें ढेर सारी रसद पहंुचा दी थी। गांववालों ने हमें धोखा दिया; पर कम-से-कम अपने साथ आए सिपाही और पुलिस तो धोखा नहीं देंगे, इस विश्वास से मंदिर पर आमने से आक्रमण करने आए ह्यूम साहब उन सिपाहियों को उनके मंदिर में छोड़कर इटावा की ओर भाग गए।
उस दिन अर्थात् तारीख 19 मई को ही इटावा की नेटिव सेना विद्रोह करेगी, ऐसी खबर सब ओर थी। परंतु उस सेना का मुख्यालय
को गांववालों ने उनका सफाया करना छोड़ उनकी प्रशंसा करते हुए उन्हें ढेर सारी रसद पहंुचा दी थी। गांववालों ने हमें धोखा दिया; पर कम-से-कम अपने साथ आए सिपाही और पुलिस तो धोखा नहीं देंगे, इस विश्वास से मंदिर पर आमने से आक्रमण करने आए ह्यूम साहब उन सिपाहियों को उनके मंदिर में छोड़कर इटावा की ओर भाग गए।
उस दिन अर्थात् तारीख 19 मई को ही इटावा की नेटिव सेना विद्रोह करेगी, ऐसी खबर सब ओर थी। परंतु उस सेना का मुख्यालय