1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

अलीगढ़ में होने से और उधर से विद्रोह का आदेश अभी न मिलने से इटावा की नेटिव सेना अवश्य ही चुप होकर बैठ गई होती, परंतु मध्यांतर में ही उस शहीद ब्राह्यण के आत्मयज्ञ की ज्वालाएं एकाएक भड़क उठने का समाचार इटावा में 22 तारीख को पहंुच जाने से वहां के सिपाहियों को विद्रोह करना आवश्यक हो गया। दिनांक 23 मई को वहां की सारी सेना ने ‘हर-हर-महादेव’ की घोषणा कर दी और एक हाथ में तलवार तथा दूसरे हाथ में जलती कब्जे में


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अलीगढ़ में होने से और उधर से विद्रोह का आदेश अभी न मिलने से इटावा की नेटिव सेना अवश्य ही चुप होकर बैठ गई होती, परंतु मध्यांतर में ही उस शहीद ब्राह्यण के आत्मयज्ञ की ज्वालाएं एकाएक भड़क उठने का समाचार इटावा में 22 तारीख को पहंुच जाने से वहां के सिपाहियों को विद्रोह करना आवश्यक हो गया। दिनांक 23 मई को वहां की सारी सेना ने ‘हर-हर-महादेव’ की घोषणा कर दी और एक हाथ में तलवार तथा दूसरे हाथ में जलती कब्जे में


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