और मेरठ से वहां लाई गई 15वीं रेजिमेंट-इतनी सेना इकट्ठा थी। मेरठ से कुछ दिनों पूर्व ही लाई गई इस रेजिमेंट में अंगे्रजी सरकार के प्रति अति द्वेष और उसे उतार फेंकने की उत्कट लालसा पूरी तरह भरी हुई थी। मेरठ की गुप्त सभाओं में जो-जो प्रस्ताव हुए वे सब आमने-सामने नसीराबाद के सिपाहियों को समझाकर कहने को प्राप्त हुआ। यह दुर्लभ अवसर मेरठ के उन एक जहार राजनीतिक प्रचारकों (उपदेशकों) ने व्यर्थ गंवाया होता तो ही
और मेरठ से वहां लाई गई 15वीं रेजिमेंट-इतनी सेना इकट्ठा थी। मेरठ से कुछ दिनों पूर्व ही लाई गई इस रेजिमेंट में अंगे्रजी सरकार के प्रति अति द्वेष और उसे उतार फेंकने की उत्कट लालसा पूरी तरह भरी हुई थी। मेरठ की गुप्त सभाओं में जो-जो प्रस्ताव हुए वे सब आमने-सामने नसीराबाद के सिपाहियों को समझाकर कहने को प्राप्त हुआ। यह दुर्लभ अवसर मेरठ के उन एक जहार राजनीतिक प्रचारकों (उपदेशकों) ने व्यर्थ गंवाया होता तो ही