अब इस तरह के आदेश से शांति स्थापित होने के दिन नहीं रहे थे; क्योंकि सिपाहियों को डर कारतूसों का नहीं था, वहां कारतूसों के संबंध में कैसा भी आदेश दिया जाए, तो भी उसका क्या उपयोग? अंगे्रजों को आदेश देने का अधिकार रहे या न रहे, यही जहां चर्चा थी वहां नया आदेश देने से वह चर्चा बंद न होकर उलटे अधिक तीव्र होनी थी; अब कारतूसों के प्रकरण में अच्छा या बुरा, कैसा भी व्याख्यान देना विषयांतर ही था; क्योंकि दिल्ली
अब इस तरह के आदेश से शांति स्थापित होने के दिन नहीं रहे थे; क्योंकि सिपाहियों को डर कारतूसों का नहीं था, वहां कारतूसों के संबंध में कैसा भी आदेश दिया जाए, तो भी उसका क्या उपयोग? अंगे्रजों को आदेश देने का अधिकार रहे या न रहे, यही जहां चर्चा थी वहां नया आदेश देने से वह चर्चा बंद न होकर उलटे अधिक तीव्र होनी थी; अब कारतूसों के प्रकरण में अच्छा या बुरा, कैसा भी व्याख्यान देना विषयांतर ही था; क्योंकि दिल्ली