1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

बीच मेरठ से चले सौ सिपाही चुपके से लाइन में कुछ दिन रहकर और उधर के उत्क्षोभक समाचारों से क्रांति की हवा अधिक भरकर चले गए। फिर भी सिपाहियों ने ऊपर से शांति बनाए रखी थी। यूरोपियन लोग अपने बाल-बच्चे वापस बुला लें, यह निवेदन् उसमें सिपाहियों के सूबेदार कर रहे थे। परंतु यह निवेदन माना जाने से पहले ही 29 मई को ऐसी भूमिका बनी कि प्रातः नदी पर नहाते समय उस दिन दोपहर को दो बजे ही यूरोपियनों को कत्ल करने की


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बीच मेरठ से चले सौ सिपाही चुपके से लाइन में कुछ दिन रहकर और उधर के उत्क्षोभक समाचारों से क्रांति की हवा अधिक भरकर चले गए। फिर भी सिपाहियों ने ऊपर से शांति बनाए रखी थी। यूरोपियन लोग अपने बाल-बच्चे वापस बुला लें, यह निवेदन् उसमें सिपाहियों के सूबेदार कर रहे थे। परंतु यह निवेदन माना जाने से पहले ही 29 मई को ऐसी भूमिका बनी कि प्रातः नदी पर नहाते समय उस दिन दोपहर को दो बजे ही यूरोपियनों को कत्ल करने की


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