1901 में लिखित सिक्ख इतिहास की पांडुलिपि के समान यह भी सदा के लिए खो गई है। जी.एम.जोशी लिखते हैं कि ‘‘सावरकर की गिरफ्तारी के बाद मूल मराठी पुस्तक की पांडुलिपि को मैडम कामा के पास पेरिस भेज दिया गया थां उन्होंने ब्रिटिश गुप्तचर विभाग के एजेंटों के हाथ में पड़ने से बचाने के लिए उस पांडुलिपि को बैंक आॅफ फ्रांस में अपने लाॅकर में सुरक्षित छिपा दिया। फ्रांस पर जर्मनी के आक्रमण के कारण फ्रांस का शासन-तंत्र
1901 में लिखित सिक्ख इतिहास की पांडुलिपि के समान यह भी सदा के लिए खो गई है। जी.एम.जोशी लिखते हैं कि ‘‘सावरकर की गिरफ्तारी के बाद मूल मराठी पुस्तक की पांडुलिपि को मैडम कामा के पास पेरिस भेज दिया गया थां उन्होंने ब्रिटिश गुप्तचर विभाग के एजेंटों के हाथ में पड़ने से बचाने के लिए उस पांडुलिपि को बैंक आॅफ फ्रांस में अपने लाॅकर में सुरक्षित छिपा दिया। फ्रांस पर जर्मनी के आक्रमण के कारण फ्रांस का शासन-तंत्र