1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

के आदेशों का पालन न करने की घोषण की और शहर के नागरिकों ने भी उससे सहमति जताई। एक ही समय तीनों ओर से चेतावनी मिलते ही मुरादाबाद के जज साहब, कलेक्टर साहब, मजिस्टेªट साहब, सर्जन साहब और अन्य सारे साहब अपने बाल-बच्चें लेकर एक पल भी विलंब न करते हुए मुरादाबाद में दिखे उन्हें काट डाला गया। मि. पाॅवेल आदि कुछ लोगों ने इस्लाम धर्म अपनाया और अपने प्राण बचाए। सैनिकों ने खजाने पर कब्जा किया। सारी सरकारी संपŸिा


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के आदेशों का पालन न करने की घोषण की और शहर के नागरिकों ने भी उससे सहमति जताई। एक ही समय तीनों ओर से चेतावनी मिलते ही मुरादाबाद के जज साहब, कलेक्टर साहब, मजिस्टेªट साहब, सर्जन साहब और अन्य सारे साहब अपने बाल-बच्चें लेकर एक पल भी विलंब न करते हुए मुरादाबाद में दिखे उन्हें काट डाला गया। मि. पाॅवेल आदि कुछ लोगों ने इस्लाम धर्म अपनाया और अपने प्राण बचाए। सैनिकों ने खजाने पर कब्जा किया। सारी सरकारी संपŸिा


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