1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

में चला गया। सैनिकों ने खजाना लेकर दिल्ली की ओर कूच किया और बदायूं के ारे अंगे्रज अधिकारी रात में ही जंगलों में होकर भागने लगे। खाने को अन्न नहीं, पहनने को कपड़ा नहीं-ऐसी स्थिति में छिपते-छिपते कभी-कभी किसी गांववाले के घर भैंसों के पीछे, जहां गोबर की दुर्गंध से नाक फट रही थी वहां हफ्ते-हफ्ते बिताते अंगे्रज महिलाएं, अंगे्रज कलेक्टर, मजिस्टेªट अपने प्राण बचाते भाग रहे थे। कुछ मारे गए, कुछ मर गए, कुछ दयालु नेटिवों के कृपाश्रय में प्राण बचाए बने रहे।


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में चला गया। सैनिकों ने खजाना लेकर दिल्ली की ओर कूच किया और बदायूं के ारे अंगे्रज अधिकारी रात में ही जंगलों में होकर भागने लगे। खाने को अन्न नहीं, पहनने को कपड़ा नहीं-ऐसी स्थिति में छिपते-छिपते कभी-कभी किसी गांववाले के घर भैंसों के पीछे, जहां गोबर की दुर्गंध से नाक फट रही थी वहां हफ्ते-हफ्ते बिताते अंगे्रज महिलाएं, अंगे्रज कलेक्टर, मजिस्टेªट अपने प्राण बचाते भाग रहे थे। कुछ मारे गए, कुछ मर गए, कुछ दयालु नेटिवों के कृपाश्रय में प्राण बचाए बने रहे।


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