1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar



कलकŸाा से लगभग चार सौ साठ मील दूर श्री जाहृवी के किनारे बनारस शहर अपने पुरातन वैभव के साथ बसा हुआ है। भागीरथी के पवित्र, शीतल और धवल जल में प्रतिबिंबित होने का महद्भाग्य जिन शहरों को है, बनारस उन सब शहरों की पटरानी लगता है। गंगा के घाट से एक पर एक चढ़ती भुवनराजि, उनके मस्तकों पर सुवर्ण मुकुटों-से चमकते ऊंचे-ऊंचे मंदिरों के कलश, उनपर चंवर जेसे डोलते फल-पुष्पों से भरे घने वृक्ष, भिन्न-भिन्न दिवालयों


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कलकŸाा से लगभग चार सौ साठ मील दूर श्री जाहृवी के किनारे बनारस शहर अपने पुरातन वैभव के साथ बसा हुआ है। भागीरथी के पवित्र, शीतल और धवल जल में प्रतिबिंबित होने का महद्भाग्य जिन शहरों को है, बनारस उन सब शहरों की पटरानी लगता है। गंगा के घाट से एक पर एक चढ़ती भुवनराजि, उनके मस्तकों पर सुवर्ण मुकुटों-से चमकते ऊंचे-ऊंचे मंदिरों के कलश, उनपर चंवर जेसे डोलते फल-पुष्पों से भरे घने वृक्ष, भिन्न-भिन्न दिवालयों


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