1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

में बजते हजारों घंटों के अलग-अलग स्वर एक-दूसरे से मिलकर उनसे उत्पन्न होनेवाली कर्ण-मधुर एक तान और सारी संुदरता पर स्थापित श्री काशी विश्वेश्वर के अधिष्ठान आदि से बनारस शहर को अनन्य शोभा प्राप्त हुई है। आसक्ति के लिए भोग-विलासाकांक्षी, भक्ति क्षेत्र मंे अपने-अपने साध्य की सिद्धि पाते हैं। जग में वैभव का उपभोग कर पूर्णकाम हुए लोगों का काशी क्षेत्र वानप्रस्थाश्रम यर संन्यासश्रम है। इस जग में सारी आस और


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में बजते हजारों घंटों के अलग-अलग स्वर एक-दूसरे से मिलकर उनसे उत्पन्न होनेवाली कर्ण-मधुर एक तान और सारी संुदरता पर स्थापित श्री काशी विश्वेश्वर के अधिष्ठान आदि से बनारस शहर को अनन्य शोभा प्राप्त हुई है। आसक्ति के लिए भोग-विलासाकांक्षी, भक्ति क्षेत्र मंे अपने-अपने साध्य की सिद्धि पाते हैं। जग में वैभव का उपभोग कर पूर्णकाम हुए लोगों का काशी क्षेत्र वानप्रस्थाश्रम यर संन्यासश्रम है। इस जग में सारी आस और


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