उपभोग दुष्ट दुर्जनों के मत्सर या दीप्ति के कारण छिन्न-भिन्न हो जाते हैं। ऐसे भाग्यहीन और वैभवविहीन लोगों का काशी क्षेत्र और वहां की भी भागीरथी का प्रसन्न जल-तुषार-श्रम-परिहारक शांति भवन हैं।
ऐसे इस शांति भवन में अपना श्रम-परिहरण करने के लिए आनेवाले भाग्यहीन लोगों की सन् 1857 में अंगे्रजों की कृपा से बिलकुल कमी नहीं थी। दिल्ली की अमीरी
1857 का स्वातंत्र्य समर - 154
बंद होने से अशरण हुए कितने की राजपुत्र और अन्य कितने ही मुसलमान,
उपभोग दुष्ट दुर्जनों के मत्सर या दीप्ति के कारण छिन्न-भिन्न हो जाते हैं। ऐसे भाग्यहीन और वैभवविहीन लोगों का काशी क्षेत्र और वहां की भी भागीरथी का प्रसन्न जल-तुषार-श्रम-परिहारक शांति भवन हैं।
ऐसे इस शांति भवन में अपना श्रम-परिहरण करने के लिए आनेवाले भाग्यहीन लोगों की सन् 1857 में अंगे्रजों की कृपा से बिलकुल कमी नहीं थी। दिल्ली की अमीरी
1857 का स्वातंत्र्य समर - 154
बंद होने से अशरण हुए कितने की राजपुत्र और अन्य कितने ही मुसलमान,