वापस भेज दिया।’’ हरींद्र श्रीवास्तव अपनी पुस्तक ‘फाइव स्टोर्मी ईयर्स: सावरकर इन लंदन’ में इस कहानी में इतनी जानकारी और जोड़ते हैं कि ‘‘डाॅ. गोहकर उस समय अमेरिका में पढ़ रहे थे और अब महाराष्ट्र राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष हैं।’’ हरींद्र के अनुसार, ‘‘ पांडुलिपि सावरकर को मई 1949में प्राप्त हुई; पर उसमें वे दे अध्याय नहीं थे, जिन्हें ब्रिटिश गुप्तचर तंत्र ने पुस्तक पर प्रतिबंध लगने से पूर्व चोरी कर लिया
वापस भेज दिया।’’ हरींद्र श्रीवास्तव अपनी पुस्तक ‘फाइव स्टोर्मी ईयर्स: सावरकर इन लंदन’ में इस कहानी में इतनी जानकारी और जोड़ते हैं कि ‘‘डाॅ. गोहकर उस समय अमेरिका में पढ़ रहे थे और अब महाराष्ट्र राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष हैं।’’ हरींद्र के अनुसार, ‘‘ पांडुलिपि सावरकर को मई 1949में प्राप्त हुई; पर उसमें वे दे अध्याय नहीं थे, जिन्हें ब्रिटिश गुप्तचर तंत्र ने पुस्तक पर प्रतिबंध लगने से पूर्व चोरी कर लिया