गोरे अधिकारियों ने पहले से ही बनारस में रह रहे अंगे्रज लोगों के संरक्षण की बहुत व्यवस्था की हुई थी; क्योंकि उस शहर में लोक-क्षोभ-कभी-कभी गोपनीयता की सामा के बाहर फूटने से-का जोर रोकना कठिन हो जाता। पुरबिया लोग ‘हे रामजी! इन फिरंगियों की गुलामी से मुक्त करो’ कहते हुए खुलेआम मंदिरों में प्रार्थना करने लगे। अन्य स्थानों की तैयारी कितनी क्या हुई, इसकी पक्की जानकारी ज्ञात करने हेतु समितियां स्थापित की गई।
गोरे अधिकारियों ने पहले से ही बनारस में रह रहे अंगे्रज लोगों के संरक्षण की बहुत व्यवस्था की हुई थी; क्योंकि उस शहर में लोक-क्षोभ-कभी-कभी गोपनीयता की सामा के बाहर फूटने से-का जोर रोकना कठिन हो जाता। पुरबिया लोग ‘हे रामजी! इन फिरंगियों की गुलामी से मुक्त करो’ कहते हुए खुलेआम मंदिरों में प्रार्थना करने लगे। अन्य स्थानों की तैयारी कितनी क्या हुई, इसकी पक्की जानकारी ज्ञात करने हेतु समितियां स्थापित की गई।