मई माह आते ही सैनिक छावनियों में मुसलमान मौलवियों का जमघट बढ़ गया। शहर की दीवारों पर और सार्वजनिक चैतरों पर लौक-शक्ति प्रचंड विद्रोह करे, इस हेतु घोषणाएं जिय और फिरंगियों का नाश हो, इस हेतु सार्वजनिक प्रार्थना करने लगे। उसी समय बाजार में अनाज के भाव बहुत अधिक बढ़ने लगे। भाव इतने अधिक बढ़ गए तो अनाज व्यापारियों की ही अंतिम हानि कैसे है, यह अर्थशास्त्रीय सिद्धांतज ब बाजार में घूमकर अंगे्रज अधिकारियों ने
मई माह आते ही सैनिक छावनियों में मुसलमान मौलवियों का जमघट बढ़ गया। शहर की दीवारों पर और सार्वजनिक चैतरों पर लौक-शक्ति प्रचंड विद्रोह करे, इस हेतु घोषणाएं जिय और फिरंगियों का नाश हो, इस हेतु सार्वजनिक प्रार्थना करने लगे। उसी समय बाजार में अनाज के भाव बहुत अधिक बढ़ने लगे। भाव इतने अधिक बढ़ गए तो अनाज व्यापारियों की ही अंतिम हानि कैसे है, यह अर्थशास्त्रीय सिद्धांतज ब बाजार में घूमकर अंगे्रज अधिकारियों ने