पर आ गया। उन्होंने सारे यूरोपियन घरों को लूटकर जलाकर नष्ट किया। अंगे्रजी शासन की, उनके बहते रक्त के सिवाय, सारी पहचान धूल में मिला दी और जितना हो सके उतना खजाना लेकर सिपाही अवध की ओर बढ़ने लगे। बाद में शहर की वृद्ध महिलाएं और जीवन में दमड़ी भी जिसने नहीं देखी उन कंगालों को यह खजाना दिया गया, जिसपर उन्होंने जमकर स्वराज्य और दिल्ली के बादशाह का मन से आभार व्यक्त किया।
इस तरह 3 जून को आजमगढ़, 4 जून को
पर आ गया। उन्होंने सारे यूरोपियन घरों को लूटकर जलाकर नष्ट किया। अंगे्रजी शासन की, उनके बहते रक्त के सिवाय, सारी पहचान धूल में मिला दी और जितना हो सके उतना खजाना लेकर सिपाही अवध की ओर बढ़ने लगे। बाद में शहर की वृद्ध महिलाएं और जीवन में दमड़ी भी जिसने नहीं देखी उन कंगालों को यह खजाना दिया गया, जिसपर उन्होंने जमकर स्वराज्य और दिल्ली के बादशाह का मन से आभार व्यक्त किया।
इस तरह 3 जून को आजमगढ़, 4 जून को